कुतुबुद्दीन घोड़े से गिरकर मरा, यह तो सब जानते हैं, लेकिन कैसे ??? Education World Blog
नमस्कार दोस्तों, मैं एक बार फिर से आपके सामने हाजिर हुआ हूं एक और ऐतिहासिक किस्सा लेकर आप शायद ही जानते होंगे। आज हम जिस विषय पर बात करने जा रहे है वह बेहद ही दिलचस्प और रोचक होने वाला है। कुतुबुद्दीन ऐबक की मौत घोड़े से गिरकर हो गई थी, यह तो सभी जानते है लेकिन कैसे? एक लड़ाका सरदार जिसने 11 साल की उम्र में घुड़सवारी शुरू की और घोड़े पर बैठे-बैठे उसने अनेक युद्ध लड़े। और उनमें विजय भी प्राप्त की, वह घोड़े से गिरकर कैसे मर सकता है। यह आज हम आपको बताएंगे दोस्तों दुनिया के ऐसे कई ऐतिहासिक किस्से है जिसको सुनकर हम अचंभित हो ही जाते है लेकिन कई किस्से ऐसे भी है जो इतिहास के पन्नो से कही गुम हो गये है या ये कहे कि इतिहासकारों की चाटुकारी कलम ने उनपर अपना शौर्य दिखाना अपने हित में नहीं समझा। भारत के इतिहास में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की घोड़े चेतक का नाम तो सुना होगा लेकिन शायद स्वामी भक्त "शुभ्रक" को नहीं।
आइए आज जानते है लेखन के माध्यम से इस कहानी को --



'शुभ्रक की वीरता' भारतीय इतिहास और लोककथाओं की एक ऐसी अद्भुत गाथा है, जो इंसानों की नहीं बल्कि एक घोड़े की अटूट स्वामिभक्ति, साहस और वफादारी को दर्शाती है। शुभ्रक मेवाड़ (उदयपुर) के राजकुमार कर्ण सिंह का प्रिय और बेहद शक्तिशाली अश्व (घोड़ा) था, जिसने दिल्ली सल्तनत के सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक को मौत के घाट उतारकर अपने स्वामी के प्राणों की रक्षा की थी.
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