बौद्ध धर्म के संस्थापक

बौद्ध धर्म के संस्थापक कौन हैं? आइए जानते हैं।

 बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध थे। उन्हें बौद्ध धर्म का प्रवर्तक माना जाता है और उन्हें "एशिया का ज्योति पुंज" (Light of Asia) भी कहा जाता है। बौद्ध धर्म की स्थापना प्राचीन भारत में छठी शताब्दी ईसा पूर्व (लगभग 563 ईसा पूर्व से 483 ईसा पूर्व के बीच) हुई थी भगवान गौतम बुद्ध क्षत्रिय वर्ण के थे और उनका संबंध शाक्य कुल (वंश) से था। उनका जन्म एक इक्ष्वाकु वंशीय शासक परिवार में हुआ था। बौद्ध धर्म बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित एक भारतीय दार्शनिक परम्परा है।

आज के इस ब्लॉग में हम गौतम बुद्ध के प्रारंभिक जीवन, उनकी ज्ञान प्राप्ति और बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों के बारे में विस्तार से जानेंगे।


बौद्ध धर्म का इतिहास

बौद्ध धर्म का इतिहास ईसा पूर्व छठी शताब्दी में महात्मा गौतम बुद्ध के जन्म और उनकी शिक्षाओं के साथ शुरू हुआ था। यह प्राचीन भारत के मगध साम्राज्य और उसके आसपास के क्षेत्रों में फला-फूला और धीरे-धीरे पूरे एशिया में फैल गया। आज यह विश्व का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।

मौर्य सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया और इसके प्रचार के लिए देश-विदेश में अपने प्रचारक भेजे। व्यापार मार्गों और भिक्षुओं के माध्यम से यह श्रीलंका, चीन, जापान, तिब्बत और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैल गया।

महत्वपूर्ण बिंदु👉      महात्मा गौतम बुद्ध का संक्षिप्त जीवन परिचय:-

मुख्य बिंदु

संक्षिप्त विवरण

मूल नाम

सिद्धार्थ (शाक्य कुल के राजकुमार)

जन्म

563 ईसा पूर्व, लुंबिनी (नेपाल)

माता-पिता

राजा शुद्धोधन एवं रानी महामाया

परिवार

यशोधरा (पत्नी), राहुल (पुत्र)

गृहत्याग

29 वर्ष की आयु में (महाभिनिष्क्रमण)

ज्ञान प्राप्ति

35 वर्ष की आयु में, बोधगया (बिहार)

प्रथम उपदेश

सारनाथ में (धर्मचक्रप्रवर्तन)

मूल शिक्षा

चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, मध्यम मार्ग

                              

बौद्ध धर्म के मुख्य सिद्धांत

बौद्ध धर्म के मुख्य सिद्धांत गौतम बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित हैं, जिनमें चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग और प्रतीत्यसमुत्पाद शामिल हैं। ये सिद्धांत मनुष्य को जीवन के दुखों से मुक्ति और शांति पाने का सरल रास्ता दिखाते हैं। 

  • दुख: संसार में सब तरफ दुख है।
  • दुख समुदाय: हर दुख का कोई न कोई कारण है (मुख्य कारण तृष्णा या इच्छा है)।
  • दुख निरोध: दुखों से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा: दुखों को दूर करने का एक मार्ग है।
  • बुद्ध ने दुखों से मुक्ति और मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त करने के लिए आठ मार्गों का सुझाव दिया:
    सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक, सम्यक कर्मांत, सम्यक आजीव, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि।


    महापरिनिर्वाण (मृत्यु)

    गौतम बुद्ध ने जीवनभर घूम-घूम कर लोगों को अहिंसा, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। 80 वर्ष की आयु में (483 ईसा पूर्व) उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। इस घटना को 'महापरिनिर्वाण' कहा जाता है।

    बौद्ध धर्म के पतन का कारण


    भारत में बौद्ध धर्म के पतन के मुख्य कारण राज्याश्रय का अभाव, बौद्ध संघों में आंतरिक भ्रष्टाचार और हीनयान-महायान आदि संप्रदायों में विभाजन थे। इसके अलावा हिंदू धर्म का पुनरुत्थान और तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा नालंदा व विक्रमशिला जैसे बड़े बौद्ध शिक्षा केंद्रों का नष्ट होना भी शामिल है


     सम्राट अशोक, कनिष्क और हर्षवर्धन के बाद के राजाओं ने बौद्ध धर्म को संरक्षण देना बंद कर दिया, जिससे आर्थिक मदद रुक गई। 12वीं शताब्दी के आसपास तुर्क और मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे बड़े बौद्ध विहारों व विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया गया, जिससे बौद्ध धर्म की रीढ़ टूट गई।


    निष्कर्ष

    महात्मा गौतम बुद्ध का जीवन और उनके विचार आज के आधुनिक युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने ढाई हजार साल पहले थे। उनका संदेश बहुत सरल था- "मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है, जन्म से नहीं।"

    यदि आप इस ब्लॉग में बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथों (त्रिपिटक) या बौद्ध संगीतियों की जानकारी भी जानना चाहते हैं, तो मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।




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