क्या आप जानते हैं रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है ? इसका महत्व, पौराणिक कथाएँ और इतिहास (Complete Guide) हिंदी में
नमस्कार दोस्तों, रक्षाबंधन का पर्व अर्थात, राखी बांधने का मतलब भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट बंधन को दर्शाता है। इस दिन भाई उनकी जीवन भर रक्षा करने के लिए संकल्प लेते है। इसके पौराणिक कथाओं तथा इतिहास के अनुसार सभी जगह अलग-अलग महत्व देखने को मिलता है।
यह हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा (सावन पूर्णिमा) के दिन मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र या राखी बांधती हैं, उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और भाई उनकी जीवनभर रक्षा करने का वचन देते हैं।
आज इस ब्लॉग Education World के माध्यम से आपको रक्षाबंधन क्यों मनाते है ? इसका इतिहास, सामाजिक तथा पौराणिक महत्वों के बारे में, इन सारे प्रश्नो की जानकारी मिलने वाले हैं। आइए शुरू करते है___
पौराणिक कथाओं तथा इसके महत्व
- भगवान कृष्ण और द्रौपदी: महाभारत काल की यह कथा सबसे अधिक प्रचलित है। जब भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध करने के लिए सुदर्शन चक्र चलाया, तो उनकी उंगली में चोट लग गई और खून बहने लगा। तब द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया था। कृष्ण ने इस धागे का मान रखते हुए द्रौपदी को अपनी बहन माना और चीरहरण के समय उनकी रक्षा कर अपना वचन निभाया था।
- राजा बलि और माता लक्ष्मी: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दानवीर राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके साथ पाताल लोक में रहने लगे थे। माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ लाना चाहती थीं। उन्होंने सावन पूर्णिमा के दिन एक गरीब महिला का रूप धरकर राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई बना लिया। उपहार के रूप में उन्होंने भगवान विष्णु को वापस मांग लिया।
- मंत्र : राखी बांधते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है:
"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥"
ऐतिहासिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अलावा, इतिहास में भी रक्षाबंधन के कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं जिन्होंने इस त्योहार को और मजबूत बनाया।
- रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं: चित्तौड़ की राजपूत रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के आक्रमण से अपने राज्य की रक्षा के लिए मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने राखी का मान रखा और कर्णावती की रक्षा के लिए अपनी सेना लेकर चित्तौड़ की ओर चल पड़ा था।
- सिकंदर और राजा पुरू (पोरस): जब सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया, तो उसकी पत्नी 'रॉक्सना' ने राजा पोरस को राखी भेजी थी और युद्ध में सिकंदर को न मारने का वचन मांगा था। पोरस ने युद्ध के मैदान में सिकंदर पर जानलेवा हमला करने का मौका मिलने के बावजूद राखी का मान रखते हुए उसे छोड़ दिया था।
आज के आधुनिक दौर में रक्षाबंधन का दायरा सिर्फ सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं रह गया है। यह त्योहार समाज को जोड़ने का काम करता है:
आपसी भाईचारा: आज लोग जाति और धर्म की दीवारों को तोड़कर एक-दूसरे को राखी बांधते हैं, जो सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देता है।
नारी सम्मान का संदेश: यह पर्व हर पुरुष को समाज की हर महिला का सम्मान और उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी की याद दिलाता है।
प्रकृति से जुड़ाव (वृक्ष रक्षाबंधन): आजकल लोग पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ों को भी राखी बांधते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।
रक्षाबंधन का त्योहार हमें सिखाता है कि रिश्ते खून से नहीं, बल्कि दिल और पवित्र भावनाओं से बनते हैं। राखी का वह छोटा सा धागा दुनिया के सबसे मजबूत बंधनों में से एक है। इस रक्षाबंधन, आइए हम सब मिलकर केवल अपनी बहनों की ही नहीं, बल्कि समाज की हर नारी और अपनी प्रकृति की रक्षा करने का भी सच्चा संकल्प लें।
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आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं!

