गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

गुरु पूर्णिमा की कहानी क्या है?आइए जानते हैं...

 गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व हमारे जीवन से अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले गुरुओं को समर्पित है। सनातन परंपरा में गुरु को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। हर साल आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पूरे देश में गुरु पूर्णिमा का त्योहार बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन महान ऋषि महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इस खास दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।

इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है और इसका धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व क्या है।

गुरु पूर्णिमा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

  •  इस दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म और वेदों का विभाजन करने वाले महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्हें पहला गुरु माना जाता है, इसलिए उनके सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है।
  • शिव का आदि गुरु बनना: योग परंपरा के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही आदियोगी शिव ने सप्तऋषियों को अपना पहला ज्ञान (योग और अध्यात्म) देना शुरू किया था, जिससे वे 'आदि गुरु' बने।
  • बौद्ध धर्म का प्रसंग: मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने बोधगया के बाद सारनाथ में इसी पूर्णिमा के दिन अपने पहले पांच शिष्यों को अपना प्रथम उपदेश दिया था।
  • जैन परंपरा: जैन मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान महावीर ने गौतम स्वामी को अपना पहला शिष्य बनाया था।
  • धार्मिक महत्व
  •  'गु' का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' का अर्थ है प्रकाश (ज्ञान)। गुरु शिष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
  • हिंदू धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है। गुरु शिष्य का नया आध्यात्मिक जन्म करते हैं (ब्रह्मा), उसके ज्ञान की रक्षा करते हैं (विष्णु), और उसके विकारों का नाश करते हैं (शिव)।
  • चातुर्मास (चार महीने का पवित्र समय) की शुरुआत इसी दिन से होती है। इस दौरान साधु-संत एक स्थान पर रुककर साधना, स्वाध्याय और धार्मिक प्रवचन करते हैं।
  •  यह दिन शिष्यों के लिए अपने गुरुओं के प्रति आदर, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे बड़ा अवसर होता है।
  • गुरु पूर्णिमा के विशेष मंत्र

  • गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु मंत्र का जाप और गुरु की साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। 
  • गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ (यह गुरु को त्रिदेवों का स्वरूप मानकर उनका अभिवादन करने का सबसे मुख्य मंत्र है।)

        शांति और मार्गदर्शन मंत्र: ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥

       (हे गुरु, मुझे असत्य से सत्य की ओर और अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें।)

निष्कर्ष

गुरु केवल वह नहीं है जो हमें किताबी ज्ञान दे, बल्कि माता-पिता, बड़े भाई-बहन या कोई भी व्यक्ति जो हमें जीवन की सही राह दिखाए, वह हमारा गुरु है। आइए, इस गुरु पूर्णिमा पर अपने सभी मार्गदर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करें ।
गुरु पूर्णिमा के बारे में आप क्या जानते हैं और आपको कौन सा मंत्र अच्छा लगता है कमेंट बॉक्स में Share जरूर करें । 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.